
Article by FOOTEM
मैनचेस्टर सिटी के पूर्व कप्तान फर्नांडिन्हो ने अपनी कप्तानी और नेतृत्व शैली को लेकर अहम बातें साझा की हैं। उन्होंने बताया कि टीम के साथियों पर चिल्लाने के बजाय, वे ट्रेनिंग के दौरान उन्हें ‘किक’ मारना बेहतर समझते थे। पेप गार्डियोला के मार्गदर्शन में मैनचेस्टर सिटी के दबदबे के पीछे उनकी यही निस्वार्थ नेतृत्व शैली एक बड़ा कारण रही है।
40 वर्षीय ब्राजीलियाई खिलाड़ी फर्नांडिन्हो ने नवंबर में फुटबॉल से संन्यास ले लिया था। वे मैनचेस्टर सिटी के तकनीकी खिलाड़ियों के लिए एक रक्षक और टीम का माहौल तैयार करने वाले सबसे महत्वपूर्ण खिलाड़ी रहे। उन्होंने 2020-21 सीजन के दौरान गार्डियोला की शिकायत के बाद नए साल के दिन एक प्रभावशाली बैठक बुलाई थी, जिसने टीम का रुख पूरी तरह बदल दिया। इस बैठक के बाद सिटी ने लगातार 17 मैचों में जीत दर्ज की और खिताब अपने नाम किया।
फर्नांडिन्हो ने कहा, “मैं साथियों पर चिल्लाने के बजाय ट्रेनिंग में उन्हें किक मारना बेहतर समझता हूं।” उनके इस दृष्टिकोण का असर रॉड्रि, इल्काय गुंडोगन और बर्नार्डो सिल्वा जैसे सितारों पर भी पड़ा, जिन्होंने इस सीजन में उनकी तरह ही नेतृत्व की भूमिका निभाई है। फर्नांडिन्हो अपनी भूमिका को टीम के हमलावर खिलाड़ियों को टैक्टिकल फाउल के जरिए मैदान पर थोड़ा समय देने और साथ ही अनुशासन व उच्च मानकों को बनाए रखने के रूप में देखते थे।
एथलेटिको पैरानिएंस में दो सीजन बिताने के बाद, अब पूर्व शाख्तार और मैनचेस्टर सिटी के मिडफील्डर फर्नांडिन्हो ब्राजील में अपने परिवार के साथ समय बिता रहे हैं। वे फिलहाल अपने जीवन का आनंद ले रहे हैं, लेकिन उन्होंने भविष्य में किसी न किसी भूमिका में इंग्लैंड लौटने की संभावना से इनकार नहीं किया है।
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